Tuesday, December 9, 2014

Good Morning

नविप्रपादोदकपंकीलानि 
न वेदशास्त्रध्वनि गजिॅतानि।
स्वाहास्वधाकार विवजिॅतानि श्मशान तुल्यानि गृहानि तानि।।

जिस के घर मे ब्राह्मण के चरण की रज गिरी न हो ।वेद और शास्त्र का गान न हुआ हो। स्वाहा और स्वधा का गान घर में न हुआ हो। वो घर श्मशान तुल्य  समझना चाहिए।


No comments: