सत्यं विधातुं निजभृत्यभाषितं...... |
श्रीभागवत |
👣 भगवान् अपने भक्त का वचन सत्य करने के लिये कहीं भी, कभी भी, किसी भी स्वरूप में प्रकट हो जाते है, क्योंकि वे सर्वत्र है |
👉🏻 यही बात समझानें भगवान् नरसिंह का प्रादुर्भाव हैं, अतः भगवान् में विश्वास तनिक भी कम न हो |
श्री नरसिंह-चतुर्दशी की वधाई
💐❤🙏🏻👹🙏🏻❤💐
🙏🏼 🙏🏼
*संपदा सुस्थितंमन्यो भवति स्वल्पयापि यः।*
*कृतकृत्यो विधिर्मन्ये न वर्धयति तस्य ताम्।।*
👇🏼अर्थ👇🏼
जो मनुष्य थोड़ी सी संपत्ति से अपने को सुखी मानता है, विधाता समाप्तकार्य मान कर उस मनुष्य की उस संपत्ति को नहीं बढ़ाता है।
🌹आपका दीन मंगलमय रहे🌹
No comments:
Post a Comment