Saturday, May 6, 2017

*नवदुर्गा: नौ रूपों में स्त्री जीवन का पूर्ण बिम्ब..👇* *एक स्त्री के पूरे जीवनचक्र का बिम्ब है नवदुर्गा केनौ स्वरूप।* 1. जन्म ग्रहण करती हुई कन्या *"शैलपुत्री"* स्वरूप है। 2. कौमार्य अवस्था तक *"ब्रह्मचारिणी"* का रूप है। 3. विवाह से पूर्व तक चंद्रमा के समान निर्मल होने से वह *"चंद्रघंटा"* समान है। 4. नए जीव को जन्म देने के लिए गर्भ धारण करने पर वह *"कूष्मांडा"* स्वरूप में है। 5. संतान को जन्म देने के बाद वही स्त्री *"स्कन्दमाता"* हो जाती है। 6. संयम व साधना को धारण करने वाली स्त्री *"कात्यायनी"* रूप है। 7. अपने संकल्प से पति की अकाल मृत्यु को भी जीत लेने से वह *"कालरात्रि"* जैसी है। 8. संसार (कुटुंब ही उसके लिए संसार है) का उपकार करने से *"महागौरी"* हो जाती है। 9. धरती को छोड़कर स्वर्ग प्रयाण करने से पहले संसार में अपनी संतान को सिद्धि(समस्त सुख-संपदा) का आशीर्वाद देने वाली *"सिद्धिदात्री"* हो जाती है। *माँ के नवरात्रि पर्व पर आप व आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाये एवम् बधाई।।* सुप्रभातम 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

*नवदुर्गा: नौ रूपों में स्त्री जीवन का पूर्ण बिम्ब..👇*

*एक स्त्री के पूरे जीवनचक्र का बिम्ब है नवदुर्गा केनौ स्वरूप।*

1. जन्म ग्रहण करती हुई कन्या *"शैलपुत्री"* स्वरूप है।

2. कौमार्य अवस्था तक *"ब्रह्मचारिणी"* का रूप है।

3. विवाह से पूर्व तक चंद्रमा के समान निर्मल होने से वह *"चंद्रघंटा"* समान है।

4. नए जीव को जन्म देने के लिए गर्भ धारण करने पर वह *"कूष्मांडा"* स्वरूप में है।

5. संतान को जन्म देने के बाद वही स्त्री *"स्कन्दमाता"* हो जाती है।

6. संयम व साधना को धारण करने वाली स्त्री *"कात्यायनी"* रूप है।

7. अपने संकल्प से पति की अकाल मृत्यु को भी जीत लेने से वह *"कालरात्रि"* जैसी है।

8. संसार (कुटुंब ही उसके लिए संसार है) का उपकार करने से *"महागौरी"* हो जाती है।

9. धरती को छोड़कर स्वर्ग प्रयाण करने से पहले संसार में अपनी संतान को सिद्धि(समस्त सुख-संपदा) का आशीर्वाद देने वाली *"सिद्धिदात्री"* हो जाती है।

*माँ के नवरात्रि पर्व पर आप व आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाये एवम् बधाई।।*
सुप्रभातम
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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