Sunday, May 7, 2017

*"ग्रह क्या करेंगे, अनुग्रह के आगे"*_ जिस पर प्रभु का अनुग्रह होता है. वहां ग्रह का विग्रह (झगडा) नहीं रहता है. अनुग्रह के आगे ग्रह क्या करेगा. ग्रह तो क्या ? ग्राह से भी गजेन्द्र को छुडाया है अनुग्रह ने. एकमात्र भगवान की शरणागति लेने से ग्रहों की गति बदल जाती है. जीवन, दुर्गति से बच जाता है. प्रगति होती है प्रभु की कृपा से जीव के ग्रह बदल जाते हैं अनुग्रह से. ब्रह्मसम्बन्ध होने के बाद वैष्णव सरनेम हो जाता है. कुंडली बदल जाती है. वह वैष्णव बन जाता हैं. उसका दूसरा (द्वितीय) जन्म अद्वितीय जीवन के रूप हो जाता है. भगवत्सेवा का अधिकार मिल जाता है. विकार दूर होकर निर्विकार जीवन प्राप्त होता है. *वचनामृत* *मनीष शर्मा*

*"ग्रह क्या करेंगे, अनुग्रह के आगे"*_
जिस पर प्रभु का अनुग्रह होता है. वहां ग्रह का विग्रह (झगडा) नहीं रहता है. अनुग्रह के आगे ग्रह क्या करेगा. ग्रह तो क्या ? ग्राह से भी गजेन्द्र को छुडाया है अनुग्रह ने. एकमात्र भगवान की शरणागति लेने से ग्रहों की गति बदल जाती है. जीवन, दुर्गति से बच जाता है. प्रगति होती है प्रभु की कृपा से जीव के ग्रह बदल जाते हैं अनुग्रह से. ब्रह्मसम्बन्ध होने के बाद वैष्णव सरनेम हो जाता है. कुंडली बदल जाती है. वह वैष्णव बन जाता हैं. उसका दूसरा (द्वितीय) जन्म अद्वितीय जीवन के रूप हो जाता है. भगवत्सेवा का अधिकार मिल जाता है. विकार दूर होकर निर्विकार जीवन प्राप्त होता है.
*वचनामृत*
*मनीष शर्मा*

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