किसी शायर ने मौत को क्या खुब कहा है;
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. .. जिंदगी मे २ मिनट कोई मेरे पास ना बैठा.. , आज सब मेरे पास बैठे जा रहे थे.. .
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. .. कोई तोहफा ना मिला आज तक.. , और आज फुल-ही-फुल दिये जा रहे थे.. .
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. .. तरस गये थे हम किसी एक हाथ के लिये.. , और आज कंधे पे कंधे दिये जा रहे थे.. .
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. .. दो कदम साथ चलने को तैयार न था कोई.. , और आज काफ़ीला बन साथ चले जा रहे थे.. .
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. .. आज पता चला मुझे की "मौत" कितनी हसीन होती है.. . कम्बख्त. . . हम तो यु ही 'जिंदगी' जिये जा रहें थे !
Friday, May 12, 2017
किसी शायर ने मौत को क्या खुब कहा है; . . .. जिंदगी मे २ मिनट कोई मेरे पास ना बैठा.. , आज सब मेरे पास बैठे जा रहे थे.. . . . .. कोई तोहफा ना मिला आज तक.. , और आज फुल-ही-फुल दिये जा रहे थे.. . . . .. तरस गये थे हम किसी एक हाथ के लिये.. , और आज कंधे पे कंधे दिये जा रहे थे.. . . . .. दो कदम साथ चलने को तैयार न था कोई.. , और आज काफ़ीला बन साथ चले जा रहे थे.. . . . .. आज पता चला मुझे की "मौत" कितनी हसीन होती है.. . कम्बख्त. . . हम तो यु ही 'जिंदगी' जिये जा रहें थे !
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