एक विचारणीय प्रश्न
सभी घरों में फर्श पर पोछा लगाने की बाल्टी होती है | पोछा लगाने के बाद आप गंदे पानी को फेंक देते हैं | दो मिनट के लिए कल्पना कीजिए कि यदि उस पोछे वाली बाल्टी का गन्दा पानी, आप के पीने वाली पानी की टंकी या बाल्टी में डाल दिया जाय तो क्या आप वह पानी पियेंगे ??
सोच कर ही घिन आ गई न ...पर आप के साथ असलियत में यही हो रहा है | आप के पीने के पानी की आपूर्ति जिस नदी से की जाती है उसी नदी में आपके शहर के सभी गंदे नाले अपने साथ मल - मूत्र अपशिष्ट लिए हुए जा मिलते हैं | मतलब ..घर पर जिस बात की कल्पना से ही आप का मन घिन से भर जाता है , बृहद स्तर पर आप के साथ वही हो रहा है |
अमेरिका और यूरोप में गंदे नाले को नदी में गिराने का पाप नहीं किया जाता , यहाँ नाले के पानी से अपशिष्ट अवशोषित करके उसे सिंचाई आदि के कार्यों में प्रयुक्त किया जाता है और ठोस कचरे को खाद में परिवर्तित कर दिया जाता है |
पर भारत, जहाँ नदियों को देवी, माँ माना जाता है वहां नदियों को बे रोक -टोक प्रदूषित करना लोगों का अधिकार बन गया | हमारे गाँव में, कसबे में ,नगर में हमारे घर से निकला हुआ हमारा नहाया हुआ, कपडे धोया हुआ, बर्तन साफ़ किया हुआ, और तो और हमारे शौचालय का पानी छोटी छोटी नालियो के माध्यम से बड़े नाले में परिवर्तित होता हुआ उन नदियों में जाता है जिन्हें हम माँ कहते है अर्थात गंगा माँ, नर्मदा माँ। क्या हमें नर्मदा और गंगा माँ का पुत्र कहलाने का अधिकार है ? उसी माँ स्वरूप नदी में हम गंदा पानी छोड़ते है और फिर हर अमावश्या और पूर्णिमा को प्लास्टिक की बोत्तल में उस माँ स्वरूप नदी का जल भर कर लाते है और फिर पूजा के समय उस पवित्र जल के २-४ बून्द पूजा के जल में भी डालते है ताकि पूजा का जल पवित्र हो जाए ..
अब दूसरी सच है ,ऊपर जिस पोंछे की बाल्टी का जिक्र किया था , उस में खून भर लीजिए और फिर वही कल्पना दुबारा कीजिए | अब तो उल्टी करने का मन हो रहा होगा | पर जाने - अनजाने में आप के पानी में बूचड़खाने का खून मिलाकर यही तो होता रहा है | आज योगी बाबा ने धर - पकड़ प्रारंभ की तो पता चल रहा है, अन्यथा सभी यूपी बासी गौ रक्त मिश्रित जल पीते रहते .. | यह घृणित कर्म आज तक उत्तर प्रदेश में वर्षो से सत्ता में काबिज रहे सत्ताधीश अपने क्षणिक लाभ के लिए करते रहे। क्या किसी समाज, या समाज के किसी जबाबदर संगठन ने नर्मदा नदी की सीमा का सर्वे किया है ? यह लेखाबद्ध किया है की नर्मदा नदी के किनारे कितने कारखाने है और कितने कारखानों का दूषित जल नर्मदा नदी में प्रवाहित होता है? सभी समाजो के लिए एक विचारणीय प्रश्न है ।
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