Sunday, May 7, 2017

चाणक्य के बाल जीवन से जुड़ी यह अद्भुत कहानी. एक बार कि घटना है, एक ज्योतिषी बालक चाणक्य के घर पधारे. अपने पुत्र के भविष्य के प्रति आश्वस्त होने के लिये चाणक्य की मां ने अपने पुत्र की जन्मपत्री उन्हें दिखलाई. जन्मपत्री देखकर ज्योतिषी ने बताया कि उसने आज तक ऐसी विलक्षण जन्मपत्री नहीं देखी. इस बालक की जन्मपत्री में तो ग्रहों का ऐसा योग पड़ा है कि वह आगे चलकर यशस्वी चक्रवर्ती सम्राट बनेगा. यह भविष्यवाणी मिथ्या नहीं हो सकती. यदि इस कथन की सत्यता की जांच करनी हो तो अपने पुत्र के सामने के दांत को गौर से देखना उस पर नागराज का चिन्ह अंकित होगा. प्रसन्न होने के स्थान पर मां चिन्तित हो गई और सोचने लगी कि चक्रवर्ती सम्राट बन उनका पुत्र उन्हें व्यस्त होने के कारण समय नहीं दे पायेगा और पुत्र वियोग की चिन्ता में उनकी आंखों में आंसू आ गये. उसी समय चाणक्य लौट आये और मां की आंखों में आंसू देखकर कारण पूछा. बहुत हठ करने पर मां ने अपने मन की शंका को बालक चाणक्य के सामने प्रकट किया. चाणक्य ने दर्पण में जा कर अपने दांत को देखा, वास्तव में वहां नागराज का चिन्ह अंकित था. चाणक्य ने बिना किसी विलंब के एक पत्थर उठाया और एक ही प्रहार से उस दांत को तोड़ दिया. बालक चाणक्य ने रक्तसना दांत उठाकर मां के चरणों में रख दिया और कहा, " मां, अब नागराज चिन्ह अंकित दांत ही नहीं रहा तो मेरे चक्रवर्ती सम्राट बनने का प्रश्न ही नहीं. मुझे तो मेरी माता का वात्सल्य ही चाहिये. मां ने अपने पुत्र को सीने से लगा लिया. नागराज के चिन्ह वाला दांत टूट जाने से विष्णुगुप्त चाणक्य चक्रवर्ती सम्राट तो नहीं बन सके पर अपनी मां के आशीर्वाद से चक्रवर्ती सम्राट निर्माता अवश्य ही बन गये और उनके नीति शास्त्र पर कई चक्रवर्ती सम्राट निछावर हो गये. 

चाणक्य के बाल जीवन से जुड़ी यह अद्भुत कहानी.

एक बार कि घटना है, एक ज्योतिषी बालक चाणक्य के घर पधारे. अपने पुत्र के भविष्य के प्रति आश्वस्त होने के लिये चाणक्य की मां ने अपने पुत्र की जन्मपत्री उन्हें दिखलाई.   जन्मपत्री देखकर ज्योतिषी ने बताया कि उसने आज तक ऐसी विलक्षण जन्मपत्री नहीं देखी.  इस बालक की जन्मपत्री  में तो ग्रहों का ऐसा योग पड़ा है कि वह आगे चलकर यशस्वी चक्रवर्ती सम्राट बनेगा.  यह भविष्यवाणी मिथ्या नहीं हो सकती.  यदि इस कथन की सत्यता की जांच करनी हो तो अपने पुत्र के सामने के दांत को गौर से देखना उस पर नागराज का चिन्ह अंकित होगा.
प्रसन्न होने के स्थान पर मां चिन्तित हो गई और सोचने लगी कि चक्रवर्ती सम्राट बन उनका पुत्र उन्हें व्यस्त होने के कारण समय नहीं दे पायेगा और पुत्र वियोग की चिन्ता में उनकी आंखों में आंसू आ गये.  उसी समय चाणक्य लौट आये और मां की आंखों में आंसू देखकर कारण पूछा.  बहुत हठ करने पर मां ने अपने मन की शंका को बालक चाणक्य के सामने प्रकट किया.
चाणक्य ने दर्पण में जा कर अपने दांत को देखा,  वास्तव में वहां नागराज का चिन्ह अंकित था.  चाणक्य ने बिना किसी विलंब के एक पत्थर उठाया और एक ही प्रहार से उस दांत को तोड़ दिया.  बालक चाणक्य ने रक्तसना दांत उठाकर मां के चरणों में रख दिया और कहा, " मां, अब नागराज चिन्ह अंकित दांत ही नहीं रहा तो मेरे चक्रवर्ती सम्राट बनने का प्रश्न ही नहीं.  मुझे तो मेरी माता का वात्सल्य ही चाहिये.  मां ने अपने पुत्र को सीने से लगा लिया. नागराज के चिन्ह वाला दांत टूट जाने से विष्णुगुप्त चाणक्य चक्रवर्ती सम्राट तो नहीं बन सके पर अपनी मां के आशीर्वाद से चक्रवर्ती सम्राट निर्माता अवश्य ही बन गये और उनके नीति शास्त्र पर कई चक्रवर्ती सम्राट निछावर हो गये. 

No comments: