ज्योतिष मे बृहस्पति को "जीव" कहा गया है , बृहस्पति जन्मपत्रिका मे जितनी अधिक श्रेष्ठ स्थिति मे होगा,उतनी ही अधिक जीवात्मा शुद्ध ओर पाप रहित होकर पुण्यात्मा होती है, तथा अपने स्वामी भगवान कि ओर प्रगति कर रही होती है ।
बृहस्पति जितनी अधिक खराब स्थिति मे होगा , उतनी ही अधिक जीवात्मा काम,क्रोध,लोभ,मोह,ईर्ष्या के वशीभूत होकर अनेक प्रकार के पाप कर्मों के जाल मे फँसी रहती है , तथा नाना प्रकार के दुःखों का भोग शरीर के माध्यम से करती है ।
Monday, May 8, 2017
ज्योतिष मे बृहस्पति को "जीव" कहा गया है , बृहस्पति जन्मपत्रिका मे जितनी अधिक श्रेष्ठ स्थिति मे होगा,उतनी ही अधिक जीवात्मा शुद्ध ओर पाप रहित होकर पुण्यात्मा होती है, तथा अपने स्वामी भगवान कि ओर प्रगति कर रही होती है । बृहस्पति जितनी अधिक खराब स्थिति मे होगा , उतनी ही अधिक जीवात्मा काम,क्रोध,लोभ,मोह,ईर्ष्या के वशीभूत होकर अनेक प्रकार के पाप कर्मों के जाल मे फँसी रहती है , तथा नाना प्रकार के दुःखों का भोग शरीर के माध्यम से करती है ।
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