आज़ादी
सबको चाहिए आज़ादी
कोई करे "मन की बात"
सुने न कोई"दिल की बात"
कोई करे "मनमर्जी की बात"
सबकी "अपनी-अपनी बात "
आज़ादी........
संसद में सांसद कह न सके"अपनी बात"
स्पीकर की भी सुने न कोई बात !!!
पक्ष-विपक्ष खूब करें आपस में......
घात-प्रतिघात होता रहे वाद-विवाद
बस ! करे न आपस में बात......
जनता की सुने न कोई आर्तनाद !!!
सुने न कोई उनकी बात .......
पत्रकार ! लिखें सिर्फ ! "अपनी बात"
टी.वी. मिडिया भी कुछ कम नही....
उन्हें तो जेसे कुछ गम नहीं ......
फैलाये जी भर विष-विषाद और वाद विवाद........
सुने न कोई उनकी भी बात .......
तथा-कतिथ बुद्धिजीवी चिल्लाते रहे....सुनी न उनकी बात........
देख-देख-सुन-सुन सिर धुना.........
समझ में न आई उनकी भी बात ......
वाद-विवाद न कोई संवाद
बस !आज़ादी.........
आम जन की रह गई क्या !यही औक़ात........
कौन ! सुनेगा कौन कहेगा लोकत्रंत्र
मार्मिक पुकार .......
चारो तरफ फैली सिर्फ ! बर्बादी-ही बर्बादी........
माँग रहे बेशर्मी से फरयादी......
ललकार ही ललकार.......
आज़ादी-आज़ादी-आज़ादी.......
ये ! कैसी ! आज़ादी
स्वरचित रचना बी. डी. गुहा रायपुर
छत्तीसगढ़
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