Monday, May 1, 2017

*कुछ गुज़री,* *कुछ गुज़ार दी,* *कुछ निखरी,* *कुछ निखार दी,* *कुछ बिगड़ी,* *कुछ बिगाड़ दी,* *कुछ अपनी रही,* *कुछ अपनों पर वार दी,* *कुछ इश्क में डूबी,* *कुछ इश्क ने तार दी,* *कुछ दोस्त साथ रहे,* *कुछ कसर दुश्मनों ने उतार दी,* *बस...* *ज़िन्दगी जैसी मिली मुझे,* *ज़िन्दगी वैसी ही गुज़ार दी..!!* 🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹

*कुछ गुज़री,*
*कुछ गुज़ार दी,*

*कुछ निखरी,*
*कुछ निखार दी,*

*कुछ बिगड़ी,*
*कुछ बिगाड़ दी,*

*कुछ अपनी रही,*
*कुछ अपनों पर वार दी,*

*कुछ इश्क में डूबी,*
*कुछ इश्क ने तार दी,*

*कुछ दोस्त साथ रहे,*
*कुछ कसर दुश्मनों ने उतार दी,*

*बस...*
*ज़िन्दगी जैसी मिली मुझे,*
*ज़िन्दगी वैसी ही गुज़ार दी..!!*

🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹

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