Monday, May 1, 2017

एक जैसी ही दिखती थी...माचिस की वो तीलियाँ, कुछ ने दिये जलाये......और कुछ ने घर, . कुछ ने महकाई....अगरबत्तियां मंदिरों में, तो कुछ ने सुलगाये.....सिगरेट के कश, . कहीं गरमाया चूल्हा...और बनी रोटियाँ, तो कहीं फटे बम....और बिखरी बोटियाँ, . जली कहीं शादी में.....बन हवनकुंड की अगन, तो फूँकी गयी....दहेज़ की कमी से कोई सुहागन, . काजल कभी....नवजात शिशु का बनाया, तो शमशान में....किसी चिता को जलाया, . एक सी दिखती थी.....माचिस की वो तीलियाँ पर, सभी ने अपना....एक अलग ही रंग दिखाया..

एक जैसी ही दिखती थी...माचिस की वो तीलियाँ,
कुछ ने दिये जलाये......और कुछ ने घर,
.
कुछ ने महकाई....अगरबत्तियां मंदिरों में,
तो कुछ ने सुलगाये.....सिगरेट के कश,
.
कहीं गरमाया चूल्हा...और बनी रोटियाँ,
तो कहीं फटे बम....और बिखरी बोटियाँ,
.
जली कहीं शादी में.....बन हवनकुंड की अगन,
तो फूँकी गयी....दहेज़ की कमी से कोई सुहागन,
.
काजल कभी....नवजात शिशु का बनाया,
तो शमशान में....किसी चिता को जलाया,

.
एक सी दिखती थी.....माचिस की वो तीलियाँ पर,
सभी ने अपना....एक अलग ही रंग दिखाया..

No comments: